Our Mission & Vision

दर्शन

ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् ।
अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।।


भावार्थ :- हे ऐश्वर्यवान परमात्मन आप हमारे सभी ऐश्वर्यों को बढ़ाओ, जिससे हम सम्पूर्ण विश्व को ऐश्वर्या युक्त कर श्रेष्ठ बनायें तथा समाज में व्याप्त अनार्यत्व एवं अवैदिकत्व का नाश करें।।

मंत्र: शांति पाठ

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: ।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥

हिन्दी रूपांतरण: शान्ति: कीजिये, प्रभु त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में, अन्तरिक्ष में, अग्नि पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में, सकल विश्व में अवचेतन में! शान्ति राष्ट्र-निर्माण सृजन, नगर, ग्राम और भवन में जीवमात्र के तन, मन और जगत के हो कण कण में, ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।। ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।। ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।।
ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।। ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।। ॐ इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ॐ ।।